Friday, December 6, 2019

تنظيم الدولة قتل ابنها فباتت تبحث عن قبره في شيكاغو

ارتدت الفنانة التشكيلية السورية عتاب حريب ملابس سوداء وتوجهت إلى مقبرة قريبة من منزلها في شيكاغو، وبحثت بين القبور عن قبر لرجل أربعيني.

لا يهم من هو صاحب القبرالذي ستختار قضاء الوقت معه. يكفي أن عمره يقارب عمر ابنها، "فاليوم هذا هو قبر مازن!".

جلست عتاب حريب إلى جانب هذا القبر. قالت الكثير عن مشاعر الاشتياق وحرقة القلب التي لم تطفئها الأعوام الخمسة التي مرت على مقتل ابنها ذبحا على يد عناصر تنظيم الدولة الإسلامية.

هذه ليست المرة الأولى التي تزور فيها حريب قبور شيكاغو وتبكي فوق ترابها. فمنذ مقتل ابنها في سوريا عام 2014، والذي لا تعرف أين دفنت جثته، وجدت حريب في مقابر شيكاغو رفيقا لها في حزنها على فراق ابنها.

تقول حريب إنها "مثقلة بروح ابنها المعذبة"، وفي رأسها سؤال لم تجد إجابة له، "مالذنب الذي اقترفه مازن كي يتجرأ الغربان السود على قطع رأسه".

ففي صباح الثاني من تشرين الثاني / نوفمبر من عام 2014، وبعد شهرين من خطف عناصر تنظيم الدولة الإسلامية لمازن عند أحد حواجز مدينة الميادين شرقي سوريا، ذبحوه وعلقوا رأسه في إحدى ساحات مدينة الرقة التي كانت حينها عاصمة للتنظيم.

تهمته بحسب ما نشر التنظيم أنه "ملحد".

وانتشر الخبر على الشبكات الاجتماعية، وهناك قرأته الفنانة التشكيلية.

تقول حريب لـ بي بي سي: "تلقيت خبر مقتل مازن الشاب الجميل الطيب من فيسبوك. الجميع كانوا يتحدثون عنه. وعلى فيسبوك كانت آخر محادثة بيننا. كنت أحذره من السفر إلى مناطق داعش في الوقت الذي كان يطمئنني بأنه لا يوجد ما يدعو للقلق".

حينها، كان مازن يعيش في العاصمة دمشق، قبل أن يتخذ قرار السفر للميادين لبيع أغراض منزله هناك ثم العودة لدمشق، حذرته والدته من السفر "لكن يبدو أنه كان يتجه إلى قدره بقدميه" على حد قول حريب.

خسارة مازن أثقلت كاهل الفنانة حريب التي كان يعرفها كل من حولها بشخصيتها "المتمردة"، فهي فنانة تشكيلية قوية الشخصية كرست فنها للدفاع عن حقوق الإنسان، وبشكل خاص حقوق الطفل.

وأجبرت الظروف حريب، ابنة مدينة دير الزور، على تربية أربعة أطفال وحدها. وتقول "لم يكن الأمر سهلا في بلد يفتقر لحقوق الإنسان، فكيف سيكون الأمر بالنسبة لامرأة مطلقة وفنانة".

واضافت: "كنت أمشي عكس التيار للتغيير، أعبر عن رأيي في كل مناسبة، من خلال الفن وتعليمه، فهذه هي القوة الناعمة الضاغطة".

لكن فور اندلاع الحرب في البلاد، كانت الفنانة من المطالبين بإسقاط النظام وإجراء تعديلات سياسية، الأمر الذي عرضها للملاحقة والتهديد.

حينها حصلت على تأشيرة للولايات المتحدة الأمريكية للمشاركة في معرض هناك، قررت عدم العودة لمنزلها في دمشق والبدء برحلة جديدة من الصفر، بانتظار أن يلحقها أبناؤها الأربعة.

لكن ثلاثة فقط من أبنائها غادروا سوريا، في حين بقي مازن الذي لقي حتفه على يد تنظيم الدولة، تاركا طفلتين وصورا وذكريات لا تفارق والدته في رسوماتها.

وأصبح الرسم بالنسبة لحريب أحد الوسائل التي تعالج بها وجعها، "فالرسم يساعدني، لكنه في نفس الوقت مؤلم، كمن ينبش في الجرح ويزيده ألما".

ويبدو ما تقوله واضحاَ في رسوماتها اليوم، فوجوه النساء (وتحديدا الأمهات) حزينة، لتعكس ما يجول في أعماق الفنانة التشكيلية.

وفي كل مرة تحاول أن تصنع فرحا في لوحتها "فتخونها مشاعرها ويتدفق حزنها تماما مثل نهر الفرات الذي تنحدر منه، والذي لا تزال روح ابنها تحوم على ضفافه" بحسب وصفها.

Friday, November 22, 2019

पश्चिम बंगाल: गाय चोरी के शक में दो लोगों की पीट-पीटकर हत्या

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार ज़िले में गाय चोरी करने के शक़ में दो लोगों को पीट-पीटकर मार देने का मामला सामने आया है. इनके नाम प्रकाश दास (32) और रबीउल इस्लाम (40) हैं.

पुलिस ने इस मामले में अब तक 14 लोगों को गिरफ़्तार किया है. यह घटना ज़िले के पुटीमारी फूलेश्वरी ग्राम पंचायत में गुरुवार को हुई.

पुलिस ने बताया कि माथाभांगा के रहने वाले प्रकाश दास (32) और रबीउल इस्लाम (40) गुरुवार सुबह एक पिकअप वैन में दो गायों को लेकर जा रहे थे. उसी समय स्थानीय लोगों ने उनका रास्ता रोक लिया और उनकी पिटाई करने लगे. उनकी गाड़ी में भी आग लगा दी.

इस घटना की सूचना मिलने पर मौक़े पर पहुंची पुलिस दोनों लोगों को गंभीर हालत में कूचबिहार मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गई. लेकिन वहां डाक्टरों ने उनको मृत घोषित कर दिया. पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि उनके पास मौजूद दोनों गाएं चोरी की थीं या नहीं.

दोनों मृतकों के कामकाज और पारिवारिक पृष्ठभूमि की भी जांच की जा रही है.

पुटीमारी फूलेश्वरी ग्राम पंचायत की प्रधान आलना यास्मीन कहती हैं, "ऐसी घटनाओं का समर्थन नहीं किया जा सकता. हो सकता है कि ग़लतफ़हमी की वजह से यह घटना घटी हो."

उधर, जिस गांव में यह घटना हुई है उसके तमाम पुरुष सदस्य फ़रार हो गए हैं.

मौक़े पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी जितेन दास (बदला हुआ नाम) बताते हैं, "हमारे गांव में रोज़ाना रात को पशु चोर आते हैं. उनके साथ गाय तस्करों के भी संबंध हैं. यहां बांग्लादेश सीमा नज़दीक ही है. चोरों को पकड़ने के लिए गांव वाले बारी-बारी पहरा देते हैं."

घटना का ब्यौरा देते हुए वो बताते हैं कि गुरुवार तड़के गाड़ी की आवाज़ से लोगों को संदेह हुआ. लोगों ने घर से निकलकर देखा कि दो लोग पिकअप वैन पर दो गाएं ले जा रहे हैं. इससे लोगों की नाराज़गी फूट पड़ी.

उसके बाद लोगों ने दोनों को गाड़ी से उतारकर उनकी पिटाई शुरू कर दी. इलाक़े के लोगों ने गायों को गाड़ी से उतारकर उसमें (गाड़ी में) आग लगा दी. स्थानीय लोगों का दावा है कि गाड़ी में कोई नंबर प्लेट नहीं थी. इससे उनका संदेह यक़ीन में बदल गया. हालांकि पुलिस ने अब तक इस बात की पुष्टि नहीं की है.

गांव के एक अन्य सदस्य नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं कि बीते एक सप्ताह के दौरान गांव से चार गाएं चुरा ली गई थीं. पुलिस को भी इसकी सूचना दी गई थी. लेकिन उससे जब कोई फ़ायदा नहीं हुआ तो गांव वालों ने रात को ख़ुद ही पहरा देने का फ़ैसला किया.

एक मृतक प्रकाश दास के चाचा सोमेश्वर दास दावा करते हैं कि उनका भतीजा बेकर था.

वो कहते हैं, "मेरा भतीजा पशुओं की ख़रीद-फरोख़्त का काम ज़रूर करता था. लेकिन वो पशु चोरी या उनकी तस्करी में शामिल नहीं था. सोमेश्वर ने कहा कि प्रकाश अपने कारोबारी साझीदार बबलू के साथ गायों को लेकर किसी को बेचने जा रहा था."

प्रकाश अपने घर का इकलौता कमाऊ सदस्य था. उन्होंने राज्य सरकार से दोषियों को कड़ी से कड़ी सज़ा देने और मृतक के परिजनों को मुआवज़ा देने की भी मांग की है.

दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि फ़िलहाल इस बात की जांच की जा रही है कि दोनों लोग क्या काम करते थे.

कूचबिहार कोतवाली थाने के एक अधिकारी नाम नहीं छापने की शर्त पर बताते हैं, "इलाक़े में बांग्लादेश से सटी सीमा के कई जगह से खुली होने के कारण यहां पशुओं की तस्करी आम है. हाल के महीनों में इलाक़े में कई गाएं ग़ायब हो चुकी हैं. इलाक़े में पशु तस्करों के कई गिरोह सक्रिय हैं."

पुलिस अधीक्षक निम्बालकर बताते हैं, "हमने 14 लोगों को गिरफ़्तार कर लिया है और बाक़ी अभियुक्तों की तलाशी में छापेमारी चल रही है. इस मामले की जांच की जा रही है. मृतकों की पृष्ठभूमि का भी पता लगाया जा रहा है. इसलिए जांच पूरी होने से पहले इस बारे में स्पष्ट रूप से कुछ कहना मुश्किल है."

Thursday, October 24, 2019

पीएम मोदी एक बार फिर गुट निरपेक्ष में नहीं जाएंगे- प्रेस रिव्यू

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुट निरपेक्ष आंदोलन के वार्षिक सम्मेलन में शामिल नहीं होंगे. उनकी जगह इस बार भारत का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू करेंगे. यह लगातार दूसरा मौक़ा है जब मोदी इस सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेंगे.

द हिंदू में प्रकाशित समाचार के मुताबिक अज़रबैज़ान की राजधानी बाकू में 25 और 26 अक्टूबर को गुट निरेपक्ष आंदोलन यानी नाम का सालाना सम्मेलन आयोजित होगा.

120 सदस्यों वाले इस संगठन का भारत संस्थापक सदस्य है. 1961 से इसकी शुरुआत से ही भारत के प्रधानमंत्री हमेशा इस सम्मेलन में हिस्सा लेते रहे. सिर्फ़ एक बार 1979 में चौधरी चरण सिंह इसमें हिस्सा नहीं ले पाए थे.

अब लगातार दूसरी बार पीएम मोदी के इसमें ना जाने और उपराष्ट्रपति को इस सम्मेलन में भेजने के फै़सले को इस तरह देखा जा रहा है कि भारत इस संगठन के प्रति अधिक गंभीर नहीं है.

जब यही सवाल विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा गया तो उन्होंने इससे इनकार किया. वहीं एक वरिष्ठ अधिकारी ने पीएम मोदी के ना आने पर कहा कि पीएम मोदी के लिए सभी बहुदेशीय कार्यक्रमों में शामिल होना संभव नहीं है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक़ पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ़ अल्वी, ईरान के राष्ट्रपति हसन रूहानी, बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना और नेपाल के प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली इस सम्ममेलन में हिस्सा लेने अज़रबैज़ान पहुंच रहे हैं.

सीबीआई ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के ख़िलाफ़ विधायकों की ख़रीद-फरोख्त की कथित कोशिश में शामिल होने के लिये मामला दर्ज किया है.

इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित समाचार में बताया गया है कि सीबीआई द्वारा 2016 की एक कथित वीडियो को लेकर उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया. उस समय राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू था.

वीडियो में रावत भाजपा में जाने वाले असंतुष्ट विधायकों के समर्थन को वापस पाने के लिए कथित रूप से पैसे को लेकर चर्चा करते हुए दिख रहे हैं.

अख़बार लिखता है कि हरीश रावत के अलावा उनके तत्कालीन साथी और उत्तराखंड में मौजूदा बीजेपी सरकार में मंत्री हरक सिंह रावत के ख़िलाफ़ भी सीबीआई ने मामला दर्ज किया है. इन दो नेताओं के अलावा समाचार प्लस चैनल के संपादक उमेश शर्मा का नाम भी सीबीआई ने दर्ज किया है.

सीबीआई ने इस मामले में प्राथमिक जांच की एक सीलबंद रिपोर्ट अदालत में पेश की थी जिस पर हाल ही में उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सीबीआई को इस मामले में आगे बढ़ने और सभी नामजद लोगों के ख़िलाफ़ प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया था.

कांग्रेस की दिल्ली इकाई को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर बुधवार को विराम लग गया. कांग्रेस ने सुभाष चोपड़ा को अपनी दिल्ली इकाई का अध्यक्ष और पूर्व सांसद कीर्ति आज़ाद को चुनाव प्रचार समिति का प्रमुख नियुक्त किया है.

हिंदुस्तान में प्रकाशित समाचार के अनुसार पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल की ओर से बुधवार को जारी बयान के मुताबिक़ कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चोपड़ा और आज़ाद की नियुक्ति की. ग़ौरतलब है कि चोपड़ा पहले भी दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रहे हैं.

Friday, October 11, 2019

महाराष्ट्र चुनाव में कितना ज़ोर है वंशवादी राजनीति का

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के मैदान में इस बार कई नए युवा चेहरे दिख रहे हैं. यह सुनने में जहां दिलचस्प लग रहा है लेकिन वहीं तथ्य यह भी है कि इनमें से कई चेहरे किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़े हैं.

पहले के कई चुनावों की तरह राजनीति से जुड़े पुराने परिवार इस मौके को अपनी अगली पीढ़ी के लॉन्च पैड के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं. लिहाजा इससे यह तथ्य और भी पुख्ता होता है कि महाराष्ट्र भी वंशवाद की राजनीति से अछूता नहीं है.

महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव 2019 राज्य के दो सबसे ताक़तवर राजनीतिक परिवारों की तीसरी पीढ़ी के चुनावी मैदान में उतरने की गवाही दे रहा है. पवार और ठाकरे.

इन्हें महाराष्ट्र की राजनीति के शीर्ष परिवारों के रूप में देखा जाता है और यहां की राजनीति अक्सर इन्हीं दोनों परिवारों के ईर्द-गिर्द घूमती दिखती है.

आदित्य ठाकरे, जो शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे के पोते हैं, ठाकरे परिवार से चुनावी मैदान में उतरने वाले पहले सदस्य हैं. तो वहीं पवार परिवार से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख और कद्दावर नेता शरद पवार के पोते रोहित पवार का भी यह पहला चुनाव है.

शिवसेना राज्य की सत्ताधारी पार्टियों में से एक रही है और इसके संस्थापक बाल ठाकरे राज्य की राजनीति में हमेशा ही एक कद्दावर शख्सियत रहे.

क्षेत्रीयता और विभाजनकारी हिंदुत्व की पहचान वाली शिवसेना ने एक बार साल 1995 में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद हासिल किया. इसके साथ ही साल 2014 से वह केंद्र और राज्य में बीजेपी की अगुवाई वाली सरकार का हिस्सा भी रही है.

लेकिन खुद को रिमोट कंट्रोल बताने वाले इसके संस्थापक बाल ठाकरे ने चुनावी मैदान में कभी अपना हाथ नहीं आजमाया. न तो वे और न ही उनके बेटे उद्धव कभी चुनाव लड़े. 2012 के बाद से शिवसेना की कमान उद्धव के हाथों में ही है.

उद्धव के चचेरे भाई राज ठाकरे ने भी कभी चुनावी अखाड़े में आजमाइश नहीं की. बाला साहेब ठाकरे से प्रेरित राज ठाकरे ने शिवसेना से अलग महाराष्ट्र नव निर्माण सेना (मनसे) के नाम से पार्टी भी बनाई और 2014 में चुनाव लड़ने का मन भी बनाया और सार्वजनिक रूप से इसकी घोषणा तक की लेकिन बाद में वो इससे पीछे हट गए.

लेकिन इस चुनाव में ठाकरे परिवार ने ऐतिहासिक फ़ैसला लेते हुए तीसरी पीढ़ी के ठाकरे यानी आदित्य ठाकरे को मुंबई की वर्ली विधानसभा सीट से उतारा है. यानी चुनाव के मैदान में उतरने वाले वे अब पहले ठाकरे बन गए हैं.

हाल ही में 'द कज़न ठाकरेः उद्धव, राज ऐंड शैडोज़ ऑफ़ देयर् सेनाज़' नाम से किताब लिखने वाले राजनीतिक पत्रकार और लेखक धवल कुलकर्णी कहते हैं, "आप भारत के सभी राजनीतिक परिवारों को समझ सकते हैं लेकिन इनमें ठाकरे परिवार बिल्कुल अलग है. क्योंकि चाहे करुणानिधि हों या मुफ़्ती या गांधी, ठाकरे परिवार ने पारंपरिक तौर पर खुद को चुनाव से अलग रखा है. हालांकि उन्होंने पार्टी और सरकार पर अपनी पकड़ पहले से मजबूत बनाई है."

वे कहते हैं, "एक तरह से कह सकते हैं कि ठाकरे परिवार ने यहां परोक्ष रूप से शासन किया है. उन्होंने यहां की सत्ता को लेकर छद्म परंपराओं का अपना ही एक तरीका बनाया. जब 1995 में पहली बार शिवसेना सरकार बनी तब बाला ठाकरे अक्सर तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर जोशी से भिड़ते हुए देखे गए थे.''

''आख़िरकार जोशी की जगह नारायण राणे को मुख्यमंत्री बनाया गया. लेकिन राणे को उनके विद्रोह के लिए ज़्यादा ख्याति मिली जब उन्होंने 2005 में शिवसेना को मुश्किलों में पहुंचा दिया था. तब रिमोट कंट्रोल से चलाई जा रही महाराष्ट्र की सरकार, जैसा कि बाला ठाकरे ने खुद कहा था, में मरोड़ पैदा हो गई.''

''इसकी सबसे बड़ी वजह यह निकल कर आई कि राज्य का मुख्यमंत्री पूरी तरह से पार्टी प्रमुख के नियंत्रण में नहीं रह सकता है. लिहाजा आदित्य की चुनाव मैदान में एंट्री शिवसेना की अब तक 'रिमोट कंट्रोल' से सरकार चलाने की राजनीति का अंत माना जा सकता है."

कुलकर्णी कहते हैं, "शिवसेना एक आक्रामक संगठन है इसलिए ऐसा माना जा सकता है कि आदित्य के सरकार में आने से सत्ता के साथ पार्टी का टकराव भी कम होगी."

दूसरी ओर पवार परिवार की तीसरी पीढ़ी के रोहित पवार भी करजात-जमखेद से चुनावी मैदान में उतरे हैं. ठाकरे के उलट पवार ने कभी ऐसा नहीं माना कि चुनाव में उनकी दिलचस्पी नहीं है.

दशकों तक महाराष्ट्र की राजनीतिक क्षितिज पर शरद पवार के वर्चस्व के बाद उनकी बेटी सुप्रिया सुले लोकसभा चुनाव जीत कर संसद पहुंची. इसके अलावा उनके भतीजे और राज्य में विपक्ष के नेता अजीत पवार उप-मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं.

2019 के विधानसभा चुनाव में पवार परिवार अपनी नई पीढ़ी के साथ उतरा है. अजीत पवार के बेटे पार्थ इसी साल मई में हुए लोकसभा चुनाव में हाथ आजमा चुके हैं. हालांकि पहली बार में उन्हें नाकामी मिली. अब शरद पवार के दूसरे पोते रोहित लॉन्च के लिए तैयार हैं.

Tuesday, October 1, 2019

Дайджест: торжества в Китае и поиски предателя в США

В США продолжается скандал из-за телефонного разговора Дональда Трампа с Владимиром Зеленским. Накануне Трамп обвинил конгрессмена-демократа Адама Шиффа предательстве и госизмене из-за его выступления в Палате представителей.

Шифф - председатель комитета по разведке Палаты представителей США. Трамп считает, что Шифф сознательно исказил содержание телефонного разговора лидеров двух стран.

Тем временем демократы в конгрессе затребовали у личного адвоката президента Руди Джулиани документы, связанные с разговором Трампа и Зеленского. Джулиани признавал, что просил украинские власти расследовать деятельность бывшего вице-президента Джо Байдена.

Джулиани в последний момент отменил свою поездку на международную конференцию в Армению, пишет Washington Post. Как ожидается, ее посетит президент Путин. Мероприятие проводится на средства России и Евразийского экономического союза.

По информации на сайте конференции, Джулиани должен был принять участие в секции, посвященной цифровым финансовым технологиям, модератор которой Сергей Глазьев находится под американскими санкциями.

Санкционный список США пополнился двумя людьми, которых Вашингтон связывает с компанией "Агентство интернет-исследований", известной как "фабрика троллей".

Также под санкциями оказались три самолета, яхта и три компании. Американское министерство финансов считает, что они связаны с российским бизнесменом Евгением Пригожиным.

Сам Пригожин не комментирует введение санкций, однако МИД России заявил, что "антироссийский выпад не останется без ответа".

Tuesday, September 24, 2019

Следствие рассказало, почему был убит певец Михаил Круг

Следственный комитет России прекратил уголовное дело об убийстве популярного исполнителя русского шансона Михаила Воробьева, автора песни "Владимирский централ", известного под псевдонимом Михаил Круг. Следствие опубликовало отчет об обстоятельствах преступления.

Что было известно ранее
Круг был застрелен 1 июля 2002 года в своем доме в одном из поселков, входящих в состав города Тверь.

По версии следствия, в убийстве участвовали двое членов преступной группировки "Тверские волки" - Александр Агеев и Дмитрий Веселов. Последний стрелял в Круга. Веселова же, как сообщалось, убил еще один участник группировки - Александр Осипов, друживший с певцом.

В 2014 году в интервью "Комсомольской правде" Осипов назвал Веселова убийцей Круга, а себя - убийцей Веселова.

В августе этого года в доме Круга прошел следственный эксперимент с участием Агеева, рассказывала "Коммерсанту" сестра певца Ольга Медведева.

Агеева, приговоренного в 2009 году к пожизненному заключению за убийства и другие преступления, этапировали из колонии особого режима "Полярная сова" в Ямало-Ненецком автономном округе, он признался в участии в этом преступлении и подтвердил версию о том, что в Круга стрелял Веселов, писал "Коммерсант". Ранее Агеев отрицал свою вину.

После следственных действий в доме Круга официальных заявлений не было. Заявление Следственный комитет России (СКР) сделал сейчас, объявив о прекращении уголовного дела.

30 июня в Твери отмечали День города. Агеев рассказал следователям, что проникнуть в дом Круга ему и Веселову велел местный криминальный авторитет по кличке Лом (СКР уточняет, что Лом погиб в 2006 году). Самого певца, по информации, "имевшейся в распоряжении участников банды", в тот вечер не должно было быть дома.

"Соучастники намеревались лишь похитить оттуда антиквариат и ценности, после чего покинуть место совершения кражи. По замыслу заказчика, Михаил Круг, обнаружив факт хищения своего имущества, обратится к нему за помощью, тот "найдет" похищенное, после чего певец станет ему обязанным и будет выплачивать часть гонораров от концертной деятельности", - говорится в сообщении СКР.

Однако Круг с семьей неожиданно вернулись и застали грабителей врасплох, сообщает следствие. После чего Веселов, "не задумываясь", сначала "применил насилие" к теще Круга, а затем два раза выстрелил в певца из пистолета ТТ калибра 7,62 мм, после чего застрелил собаку.

Круг умер в больнице от огнестрельных ранений груди и живота. Его убийство стало одним из самых резонансных в России. СКР сообщает, что добиться признательных показаний от Агеева удалось после того, как следователи смогли установить с ним "психологический контакт".

СКР подтверждает, что Веселов был убит в марте 2003 года Осиповым, отбывающим пожизненный срок. Свои мотивы Осипов объяснил так же, как пять лет назад "Комсомольской правде" - местью за "короля шансона", как называли Круга.

"С учетом смерти Дмитрия Веселова, подозреваемого в убийстве певца Михаила Круга, следствием принято решение о прекращении уголовного дела и уголовного преследования", - резюмирует СКР.